Thursday, June 18, 2015

कहानी सुपर 30 से पहले की

आनंद कुमार आज सोशल मीडिया पर हॉट ट्रेंड्स में हैं। एक कहानी इनसे सम्बंधित याद आ गयी आज।
 भूपेश कुमार और आनंद कुमार बड़े अच्छे मित्र थे। भूपेश फिजिक्स पढ़ाते थे और आनंद कुमार मैथ्स। आज से तकरीबन १५ साल पहले दोनों पटना में जद्दोजेहद कर रहे थे स्थापित शिक्षक बनने की। मैथ्स में दासगुप्ता और के सी सिन्हा जैसे दिग्गज मार्केट में थे तो फिजिक्स में अभय कुमार, अख्तर साहब आदि। भूपेश और आनंद ने नए ढंग से पढने की शुरुआत की। पर स्टूडेंट तो कम  ही आते थे। हाँ भूपेश ने इरोडोव् का सलूशन लिखा था तो कुछ स्टूडेंट इस नाम पर उनके पास आ जाते थे।
संयोग से इनके ग्रुप में जो केमिस्ट्री के शिक्षक थे, उनका एक स्टूडेंट चयनित हो गया IIT  में। अब आनंद कुमार ने आनन फानन में अपने पैम्फलेट और होर्डिंग बैनर पर उस स्टूडेंट का नाम डलवा दिया। परन्तु वो स्टूडेंट मैथ्स किसी और टीचर से पढता था। अब इसी बात को ले कर कहा सुनी हो गयी दोस्तों में। आनंद को यहाँ तक सुना दिया गया की जब IIT  निकलवा नहीं सकते हो किसी को तो पोस्टर पर नाम डालने का शौक क्यों रखते हो।
 बात बहुत बढ़ गयी। सबने अपना अलग अलग इंस्टिट्यूट खोल लिया। भूपेश गुरुकुल के नाम से इंस्टिट्यूट चलाने लगे। आनंद कुमार भी धीरे धीरे जमने लगे। अभ्यानंद जी जैसे प्रसिद्ध ब्यूरोक्रेट का सहारा भी मिल गया। आनंद कुमार चमकने लगे। पुराने मित्र टोकरी भर भर बुराई करते इनकी। पर आनंद तब तक  सुपर 30 ले कर आ गये।
उसके बाद तो सब कुछ जगजाहिर ही है।